Monday, September 30, 2013

             दिदार ........

गुलाबोंकी खुशबु भरी, सोनेकी रेत पर,
हिरोंसे लिख दूँ तेरा नाम .
मोतीके सागरमे, चंदनकी नाँवमें,
तेरे साथ रहूँ सुबह शाम .
वह सूरज, चाँद, सितारोंकी दौलत
सब कर दूँ मै तेरे नाम .
          तेरे साथ रहूँ सुबह शाम .

तेरी आँख का आँसू  या सुबहकी शबनम,
बहनेसे पहेले पी जाऊं .
तेरी एक तबस्सुमि झलक मिले तो
सारी ज़िन्दगी जी जाऊं .
जी करता है तुम्हे तकता ही रहूँ
और मुझे क्या काम .
          तेरे साथ रहूँ सुबह शाम .

गझल लिखूं तो तुमपे मुखातिब
नगमोंमे तेरा ही नाम .
शीशमहलके हर एक पहलुमे
भर दूँ तुम्ही को सलाम .
लब्ज निकले जो तेरी जुबांसे
मिले सुकूं चैनो-आराम
          तेरे साथ रहूँ सुबह शाम .

                                जयकल्प . 

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