Sunday, November 18, 2012

 रंगोने पूछा फुलोसे,
क्या होता अगर हम ना होते,

खुशबु ने टोका कलिओंसे,
यह सोचो अगर हम ना होते,

नज़ाकत पूछे पंखुरियो से,
हम ना होते तुम क्या होते,

शबनम ने भी ऐसा सोचा,
हम ना होते वह क्या होते

हवा पवन के बहेते ज़ोंके,
वह ना होते फुल क्या होते,

भंवरोंकी गुन गुन ना होती,
आप भी सोचो गुल क्या होते,

सुन्दर स्त्री के बाल ना होते,
फुल तो होते पर क्या होते,

जिस इश्वर पे चद्ती माला,
वह ना होते फुल ना होते।
 जयकल्प


Saturday, November 3, 2012


उत्क्रांति

वक़्त को वक्तसे बातें करते हमने सुना था,
सोच अगर साथ चलती तो बहोत अच्छा होता,
पर ऐसा न हुवा........(२)

सबकुछ बदल गया, कभी राही बदल गए,
जरुरत थी एक कदम बढानेकी, हाँथ थामने की,
वक़्त की नजाकत पर गौर फरमाने की,
पर ऐसा न हुवा........(२)
सोच थम गई, उसी राह से हम गुज़र गए,
पर जाते जाते सोचको सोचनेपर मजबूर कर गए,
वक़्त को वक़्तसे.........१

अब नई सोच व् नए वक्तने जनम लिया है,
दोनों साथ निभाने की कोशिश में जुटे है,
नया रूप नया रंग मनभावन है,
अब ऐसा ही हुवा......(२)
कल का सूरज नई रोशनी के साथ छा जाएगा,
और कल का अन्धेरा क्षितिज में समा जाएगा,
वक़्त को वक्तसे..........२

आनेवाली सोच वक्तसे भी तेज़ होगी,
चाँद तारों के साथ साथ ग्रहमंडल से भी आगे होगी,
पलक ज़पकनेकी देर, सोच नया अवतार धारण करेगी,
अब ऐसाही होगा.......(२)
पंचमहाभूतोंपर उसीका आधिपत्य होगा,
सोच मुस्कराएगी और यही सत्य होगा,
वक़्त को वक्तसे.........३
— at अविकल्प .

Friday, November 2, 2012

अंगाई 

ये रे ये रे वारा ,

झुलव झोपाळा ,

ये ग़ ये ग़ रातराणी ,

फुलव सुगंध बागदानी ,

येरे येरे चंदामामा ,

देऊन जा तू ,

गोड गोड पापा ,

या ग़ या चांदण्या ,

बागुलबुवा ला बांधूया ,

ये ग़ ये खारुताई ,

शेंगा,चणे खाऊ किती तरी ,

ये ये ग़ परीराणी ,

घेऊन जा तू स्वप्ननगरी ,

राशीराणी ला झोप ग़  आली ,

कोकीळताई गा ग़ तू अंगाई .

 

अविकल्प । 

मन माझे फुलपाखरू ,
रंगबिरंगी कलाकुसरी ,
अति चंचल,अति कोमल,
कधी या फुलावर ,
कधी त्या फुलावर ,
भिरभिरते गोड आठवणीवर ,
सुंदर फुलांचे रंग सुंदर ,
सुगंध फुलांचे मोहक,मोहक ,
तयांची नक्षी मज पंखावर ,
पंख माझे अति तलम ,
नाहले ते पुष्प दर्प ,
प्रलोभनाची नसे आस ,
हेलकावे वार्यासंग ,
सरगम छेडे लहरीत ,
रुष्टतेत नसे रस ,
मदनमस्त मोदात ,
शोधते मधुर मध ,
वाटण्या सर्वां रुचकर अविट .

अविकल्प ।