Wednesday, June 5, 2013

कभी गमके करीब आने की आहट ,
कभी अन्जानी मुश्किलोकी घबराहट ,
सोचता हूँ कोई सुकून तो मिले ,
सहेलाती है तब किसीके हाथोंकी गर्माहट
     मै जनता हूँ मेरे पास हो तुम हमेशा हमेशा ।

कभी उलजता हूँ दुनिया भरके रिश्तोमें,
दू:ख आते है कभी साथ तो कभी किश्तोमे,
क्या करू कुछ भी समज नहीं आता,
कुछ कमीसी नजर आती है फरिश्तों में,
      लेकिन मै जानता हूँ मेरे पास हो तुम हमेशा हमेशा।

गिरगिट की तरह मौसम  ने रंग बदल डाले,
आधे भरे या आधे रिक्त सभी प्याले उंडेल डाले,
जिन्हें उड़ना सिखाया था हवाओं पर ,
उन्होनेही मेरे पंख कुचेल डाले
      फिरभी मै जानता हूँ मेरे पास हो तुम हमेशा हमेशा ।

जानता हूँ और भी तूफान आयेंगे ,
हो सकता है मेरा सबकुछ ले जायेंगे ,
मिट जाऊंगा वक्त के सितम से कही,
बची राख़ को गर्दिश में उड़ायेंगे,
     तब भी मै जनता हूँ मेरे पास हो तूम हमेशा हमेशा ।


                                              जयकल्प ।

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