Wednesday, October 31, 2012

ख़ुशी दस्तक देती है,
बस द्वार खुलने की देरी है!

छोटी चिंटी गिरते संभलते,
जब लक्ष्य कीओर बढ़ती है,
देखकर उसकी निश्चयता,
मनको प्रसन्नता मिलती है,
ख़ुशी दस्तक देती है.........

वसंत हरियाली लाती है,
फलोंसे टहनिया लबलबाती है,
लुकाछुपी खेलती कोयल,
गुन्जनसे मन पुलकित करती है.
ख़ुशी दस्तक देती है.........

काले घने बदल गरजे,
नृत्य मन विभोर,
बारिश की छमछम बुन्दोसे,
नाचने लगे मनमोर,
ख़ुशी दस्तक देती है.........

उड़ उड़ कर तितली ज़ुमती है,
रंग बिरंगी फुलोंसे मिलती है,
सुनकर उनकी कानाफूसी,
दिल लहराने लगता है.
ख़ुशी दस्तक देती है..........

खुले आस्मां के निचे
छत पर सोए सोए,
गिनती करते तारे,
तभी टुटा तारा देखे तो,
खुशीसे दिल ज़ूम उठे.
ख़ुशी दस्तक देती है..........

सर्दी की नर्म धुप में ,
ठंडी हवाका ज़ोका लहेरे,
कोहरे की ओढ़ी चादर में,
गर्म चाय की प्याली हो जाये.
ख़ुशी  दस्तक देती है..........
ख़ुशी 

 अविकल्प

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