गहरे नीले सागर में ,
जैसे छिपसे झाँके मोती .
कालें घने आसमां में ,
जैसे चाँद सितारें बाराती .
बगियाँ में गूंजते भंवरें ,
जैसे कलियाँ देखों मुस्काती .
पेडोसें लिपटी लताएँ ,
देखों कैसे शरमाती .
बादलों के धुंद में ,
जैसे इंद्रधनुष खेले होली
शांत शीतल झीलं में
जैसे बुँदे बनाती रंगोली,
इसी तरह मिली हमें
कुछ कवियों की टोली ,
इस पर्व की खुशियों से
भरने बधाइयों की झोली
अविकल्प ।
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